मेरा नाम रवीना है मेरी उम्र 19 साल की है मेरा एक छोटा सा गांव है. जहां पर लगभग खेतीवाड़ी होती है. मैं काफी सुंदर लड़की हूं मेरा रंग गोरा है और मेरी लंबाई 6 फुट 2 इंच है. वैसे तो मेरा मन करता है कि शादी हो जाए पर मम्मी पापा पढ़ाई पर ज्यादा जोर दे रहे है. मैं जवान हो चुकी हूं और मेरे बूब्स इस तरह के हो गए हैं कि जब भी मैं रास्ते में चलती हूं तो. ऐसे हिलते हैं जैसे हवा चल रही हो. मैं ज्यादातर समीज नहीं पहनती हूं. क्योंकि थोड़ा गरीबी के चलते में अच्छे से कपड़े नहीं ले पाते हैं. इसीलिए बिना समीज डालें मैं खेतों पर भी निकल जाती हूं. खेतों में ज्यादातर लोग कम ही होते हैं. और वहां सुनसान जगह होती हैं. तो
मैं अपने बूब्स पर कई बार निगाह डालती हूं और उन्हें अपनी उंगलियोंसे खेलती हूं. और मुझे अच्छा लगता है वैसे तो मां बाप को कभी खेत पर काम के लिए नहीं भेजते. लेकिन मुझे खेतों पर जाना अच्छा लगता है. मेरे गांव के पास में एक नदी है तो मैं देखती हूं. अगर इधर-उधर कोई आदमी नहीं होता है तो मैं घंटों तक नहाती रहती हूं. क्योंकि मैं दूसरे कपड़े नहीं ले जाती हूं तो मैं उन्हीं कपड़ों में नहा लेती हूं. और मैं पानी के अंदर ही अपने हाथों से मलमल कर अपने बूब्स में धोती हूं.
क्योंकि मैं अपने बूब्स से ज्यादा खेलती हूं. तो वह काफी विकसित हो गए हैं. और मेरे बूब्स देखकर मोहल्ले के लड़के तो जैसे मर ही रहे हैं. वह मुझे देखते हैं तो सिटी मारते हैं. कई लड़के तो ऐसे हैं जो मेरे चेहरे की तरफ कम. और मेरे बूब्स की तरफ ज्यादा ही देखते रहते हैं. एक बार मै जल्दी-जल्दी ने घर से निकली क्योंकि मुझे नहाना था. और मेरे नल में पानी नहीं आ रहा था. तो मैंने सोचा जाती हूं खेत में घूम लूंगी और नदी में नहा भी लूंगी. मैं जल्दी में जा रही थी मेरे घर के पीछे एक तिराहा टाइप का बना है. जहां से एक रोड शहर की तरफ गई है. तो एक रोड मेरे खेत की तरफ. मैं जैसे खेत की तरह मुड़ी तो रामू उधर से भागा भागा आ रहा था. और उसकी मुझ से टक्कर हो गई.
अब उसकी दाईं कोहनी मेरे बूब्स पर ऐसी लगी. कि मुझे दर्द होने लगा और मैं एक एक पल के लिए उनको पकड़ कर बैठ गई. अब वह वापस आया और बोला चोट लगी क्या. तो मैंने उसको थोड़ा सा गुस्से में बोली हां. तो सॉरी बोल कर मुझे बोलाबताओ कहां पर लगी है. अब मैं उसको कैसे बताती कि मेरी चोट कहां पर लगी है. लेकिन मेरे दोनों हाथ मेरे बूब्स पर थे. तो समझ गया कि चोट वहीं पर लगी है. फिर मैं उठकर खेतपे चली गई और गर्मी बहुत ज्यादा थी तो मैं सोची नहा लेती हूं उस दिन मैं अपना दुपट्टा ले जाना भूल गई थी. तो मैं ऐसे ही चली गई. रास्ते में चलते हुए मेरा शरीर हील रहा था. तो मेरे बूब्स आपस में टकरा रहे थे. मैं बार-बार उनकी और देखती तो मुझे शर्म नहीं आती. और अच्छा लगता मैं लंबे पाव चलकर नदी के किनारे पहुंच गई. और नदी में घुस गई. अब पानी के अंदर मेरा शरीर था. और मेरी नाजुक उंगलियां मेरी छोटी सी चूत पे थी कि मुझे उस दिन बहुत कुछ कुछ होरहा था.
तो मेरा मन किया कहां जाऊं तो इसीलिए मैं नहाने आई थी. और पानी के अंदर मेरा पूरा शरीर था. तो मैं जड़ से अपना दायां हाथ अपनी चूत पर रखकर अंदर बाहर करने लगी. अचानक नदी के किनारे की तरफ किसी की आवाज सुनाई पड़ी. तो मैंने देखा कि रामू किनारे खड़ा हुआ मुझे पुकार रहा था. वह मुझसे कह रहा था ठंडा पानी है ज्यादा तबीयत खराब जाएगी . मत नहाया करो मैं उसको देख कर मुस्कुराई. उस समय मेरा हाथ मेरी चूत पर था. और मुझे अच्छा लग रहा था. एक दिन पहले ही मैंने अपनी चिड़िया को साफ की थी. तो काफी सॉफ्ट लग रही थी. मैंने उसको पानी के अंदर से बोली ने तबीयत खराब होने से नहीं डरती. और मैं रोज नहाती हूं तुम डरो तो मत नहाओ. वह काफी शर्मा गया. वह जानता था कि एक लड़की नहा रही है और एक लड़का डर रहा है. तो वह भी अपनी बलियान निकालकर अंदर कूद गया. पानी के फव्वारे मेरी तरफ आ रहे थे क्योंकि वह बहुत तेज नदी में कूदा था. तो काफी पानी में हलचल होने लगी थी मैं तो उसको देखकर काफी खुश हो गई थी कि अकेले-अकेले नहा रही थी. और एक जवान लड़का पास में नहा रहा था. तो मैं और खुश हो गई. उसकी मजबूत बॉडी इतनी गोरी चिट्टी थी कि जैसे वह जिम करके आया हो. मुझे तो बार-बार उसी को देखने का मन कर रहा था. मैंने उसको आवाज दी. थोड़ा आगे से आ जाओ मैं चाहती थी कि वह मेरे पास में आकर कुछ दूरी पर नहाए तो हम लोग बातें भी करेंगे और इतनी गर्मी में ठंडे पानीका आनंद भी उठाएंगे. और वह तो जैसे किनारे के नहाने का आदी था. क्योंकि उसको तैरना नहीं आता था. और मुझे तैरना आता था इसलिए मैं डरती नहीं थी. और कहीं पर भी कूद जाती थी मेरा मन ज्यादा उत्साह से भरा था. और मैं उत्तेजित हो रही थी.
इसीलिए उसको अपनी ओर बुला रही थी. पर वह तो आने को तैयार ही नहीं था. मैं गुस्से में पानी के बाहर निकली. और हल्के हल्के हाथों से अपने कपड़े निचोड़े. मेरे कपड़े पानी में भीग गए थे. तो मेरे बूब्स एकदम पूरी तरीके से कपड़ों से ढके दिखाई दे रहे थे. जिन पर रामू की नजर बार-बार जा रही थी. और वह मुस्कुरा रहा था मैं भी सोच रही थी कि केवल मुस्कुरा रहा है आके बूब्स ही देख ले कैसा है.लेकिन वह नहीं आया. और मैं बाहर निकल गई धूप में खड़ी होकर अपना शरीर सेकने लगी मैंने खुद को धूप में सेका और रामू से बोली अब तो निकलो पानी से नहा लिए क्या तो वह भी निकलने लगा उसने भी खुद को थोड़ी देर तक धूप में रखकर बोला चलो घर चलते हैं. अब मैं उसकी और मुस्कुरा रही थी. और आगे आगे चल दी. वह भी मेरे पीछे पीछे चल रहा था. उसकी बार - बार नजर मेरे पीछे वाले भाग पर थी. भीगने के कारण किसी तरबूज की तरह नजर आ रहे थे. और वह मुस्कुरा रहा था. मैं कभी-कभी उसको पीछे मुड़कर देखती तो वह मुस्कुरा रहा होता. मैं समझ जाती कि वह क्या देख रहा है. मैं तो यही चाहती थी वह मेरे अंग देखें. ताकि उसके मन में कुछ-कुछ हो .और मैं उसको अपने प्रेम जाल में फंसा लूं. नदी से मेरा घर थोड़ा दूरी पर था तो मुझे घर पर जाने के लिए समय लग रहा था. हम दोनों भीगे हुए थे लेकिन शायद अब रामू का भी मन करने लगा था. तो एक पेड़ के नीचे रुकी और उस पेड के पीछे एक बहुत बड़ी झाड़ी थी. मैंने उसको झाड़ी की तरफ इशारा किया चलोगे क्या. तो वह एक पल तो रुका फिर बोला तुम चलो तो चलता हूं. शायद वह भी शर्मा रहा था. लेकिन मेरा मन बहुत कर रहा था. तो मैं उसको जबरदस्ती झाडी में खींच ले गई. और झाड़ी में थोड़ी सी जगह साफ करके रामू ने अपना गमछा बिछा दिया. और वह बैठ गया मैं जानती थी मुझे क्या करना है. मैंने तुरंत उसका लन्ड अपने हाथों से निकाला.और मेरे मुंह से अरे बाप रे निकला. उसका तो एकदम भयानक और डरावना था. लेकिन मुझे ऐसे डरावने लन्ड से खेलना बहुत अच्छी तरीके से आता था. इसीलिए मैंने लगभग 5 मिनट उस से खेलती रही. और फिर उठके बैठ गई. और उठक बैठक करने लगी. उठक बैठक करते हुए मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. और रामू का चेहरा तो देखने लायक था. उसको तो जैसे कुछ मिल गया हो. उसकी आंखें बंद हो गई थी. लेकिन वह मजे में डूबा हुआ था. और मैं 10 मिनट तक उठक बैठक करती रही. और फिर मुझे भी पूरी संतुष्टि मिली. और मैं हट गई और बाहर आ गई
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