मेरा नाम योगेंद्र हैं। मैं पेशे से एक सरकारी इंजीनियर था और लोक निर्माण विभाग में काम करता था। मेरी शादी को 3 साल हो चुके थे, मैंने ये शादी अरेंज मैरिज से की थी, क्यूंकि घर से दबाव था की शादी माता पिता की मर्ज़ी से ही होनी है। मेरी पत्नी एक संस्कारी पत्नी और एक अच्छी मां थी ।उसका नाम नीलम था। हमारा एक बेटा था और वो 2 साल का होने वाला था। एक दिन मैं ऑफिस से घर वापिस आया तो मैंने देखा मेरी पत्नी की बहन यानी मेरी साली घर पर आई हुई थी। उसकी उमर 20 साल के आस पास रही होगी, उसका नाम नीलू था और वो दिखने मेंबहुत हसीन और खूबसूरत लग रही थी। मेरी पत्नी ने बताया कि नीलू को स्कूल से एक महीने कि छुट्टी मिली है, इस लिए वो अपनी छुट्टियां यहीं हमारे साथ गुजारेगी। मैंने कहा अच्छी बात है और में उसे देखते हुए अपने कमरे में चला गया।



आज ऑफिस में बहुत काम था इस कारण मैं काफी थका हुआ था, इसलिए बेड पर लेटते ही मुझे नींद आ गई। दूसरे दिन सुबह सवेरे नीलू मेरे लिए बेड चाय लेकर आई। मैं अभी नींद में था। जब वो मेरे पास चाय देने आई तो मुझे लगा यह मेरी पत्नी नीलम है। मैंने उसे पकड़ कर अपने पास कर लिया और उसके साथ मज़ाक करने लगा, वो भी मेरा साथ देने लगी। फिर जैसे ही मैंने आंखें खोल कर देखा तो यह नीलू थी। अपनी साली को देखते ही मैंने तुरंत उसे छोड़ दिया और उससे माफ़ी मांगी। उसे इस तरह पकड़ कर अपने पास करने से मेरे पूरे शरीर में तो बिजली सी दौड़ गई थी। इस बात को ना तो मैंने किसी से कहा ना ही मेरी साली ने और बात आई गई हो गई। फिर दूसरे दिन मैं ऑफिस से थोड़ा जल्दी फ्री हो गया था, इसलिए घर जल्दी वापिस आ गया, उस वक्त मेरी पत्नी बच्चे को लेकर मार्केट गई हुई थी। मुझे लगा शायद मेरी साली नीलू भी उसके साथ गई हुई है। क्यूंकि घर में कोई भी दिखाई नहीं दें रहा था, मैं अपने कमरे में आया और कपड़े बदल कर सीधा वाशरूम में चला गया। वाशरूम का दरवाज़ा भी खुला हुआ था, जैसे ही मैंने वाशरूम का दरवाजा खोला तो नीलू अंदर बिना कपड़ों के नहा रहीथी। उसे इस हाल में देखते ही मेरी तो जैसे सांसें ही अटक गई। वह मुझे देख कर मुस्कुराने लगी और बोली क्या हुआ जीजू, आपकी साँसे क्यों ऊपर नीचे हो रही है। उसकी खूबसूरती देख कर मैं कुछ पलों के लिए जैसे सुन्न सा हो गया था, फिर जल्दी से दरवाज़ा बंद किया और कहा की दरवाजा अंदर से बंद करके नहाया करो, और उसे सॉरी बोलते हुए वापस अपने रूम में चला गया। उस रात मेरे दिमाग में नीलू का ख्याल आता रहा, उसको जिस हालत में देखा था वो बार बार मेरे सामने आ रहा था,


इसी कारण मै रात में अच्छे से सो भी नहीं पाया। लेकिन एक बात मुझे हैरान करती थी की इतना सब होने के बाद भी मेरी साली को कुछ भी बुरा नहीं लगा, और ना ही उसने ये बाते कभी अपनी दीदी से कही, फिर कुछ दिन ऐसे ही गुजरता रहा। इस बीच नीलू की हरकर्ते मुझे काफी अजीब लगने लगी थीं। वो हमेशा मेरी तरफ कुछ अजीब नजरों से देखती । उसे जब भी मुझे टच करने का मौका मिलता वो बेझिझक टच कर लेती। और कई बार तो जब मेरा बेटा मेरे पास होता तो वह उसे लेने के बहाने मेरे बहुत करीब भी आ जाती थी। मुझे नीलू का यह सब करना ठीक नहीं लग रहा था। लेकिन मैंने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। फिर एक दिन मेरी पत्नी को बच्चे को टीका लगवाने हॉस्पिटल जाना था। 


उस दिन मुझे ऑफिस से छुट्टी थी। मैं जब थोड़ा सा लेट सो कर उठा तो पास वाले कमरे से मुझे मेरी पत्नी और साली नीलू की आवाजें सुनाई दे रहीं थीं। मेरी पत्नी नीलू को अपने साथ हॉस्पिटल लेकर जाना चाहती थी, लेकिन नीलू ने कहा उसे बच्चों को इंजेक्शन लगाते देखा नहीं जाता और उसकी तबियत ख़राब हो जाती हैं इसीलिए वह नहीं जा पाएगी। तब कुछ देर के बाद मेरी पत्नी बच्चे को लेकर टीका लगवाने हॉस्पिटल के लिए निकल गई। अब मैं और मेरी साली नीलू दोनों घर पर अकेले थे। मैं अपने कमरे में बैठ कर टीवी पर कुछ देख रहा था। तभी नीलू मेरे कमरे में आई और मेरे काफी करीब आकर बैठ गई और कहने लगी जीजू क्या आप मेरे सर पर हाथ लगा कर देख सकते हैं कि मुझे बुखार है या नहीं।उसने अभी भी रात वाली पतली सी नाइट ड्रेस पहन रखी थी जिसमें से काफ़ी कुछ दिखाई दें रहा था। मैं उसके सर अपना हाथ रखकर देखने लगा।


उसका सर तो बिलकुल ठंडा था। जब मैंने उसे बताया कि उसका सर तो बिलकुल ठंडा हैं, उसे बुखार बिलकुल भीन हीं है तो उसने थोड़ा मुस्कुराते हुए कहा, आप को तो मेरा असली वाला बुखार शायद नजर ही नहीं आ रहा। मैं उसकी बात समझ नहीं पाया और पूछा कि क्या मतलब, उतने में मुझे मेरी साली ने एक किस कर लिया। एक पल के लिए तो मैं जम सा गया, मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था के यह सब क्या चल रहा है।मैंने खुद को उससे दूर किया और कहा नीलू यह सब ठीक नहीं है, हमारे रिश्ते कि एक मर्यादा है और इस मर्यादा कि इज्जत करना चाहिए, और अगर तुम्हारी बहन को यह सब पता चल गया तो, मै अभी अपनी बात पूरी कर पाता उससे पहले ही उसने रात वाली नाईटी को अपनेनीचे खींच दिया। मैं तो जैसे सदमे में चला गया। मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था, अब मेरे सामने नीलू उसी तरह खड़ी थी जैसे उस दिन वाशरूम में थी, और उसे इस तरह से देख कर मेरी आंखें तो खुली की खुली रह गईं। एक तो वह वैसे ही बहुत हसीन थी। ऊपर से इस हाल में देखना, मेरे लिए तो नज़र हटाना मुश्किल हो गया था। फिर वो मेरे करीब आई और बोली कि जीजू इसमें गलत क्या है। जब मुझे कोई दिक्कत नहीं है, तो आपको इसमें क्या दिक्कत हैं, अब मैं निःशब्द हो गया था और मैं ना चाहते हुए भी खुद को उसके करीब जाने से रोक नहीं पा रहा था। फिर उसने मुझ से मज़ाक करना शुरु कर दिया, जोकि मुझे भी अच्छा लग रहा था। अब मैं भी अपने जज्बातों पर काबू नहीं रख पा रहा था और मैं भी अपना होश खो बैठा। 


मैं जैसे ही उसके ऊपर आने को मुड़ा तभी मेरी नजर सामने लगी अपनी बीवी और बच्चे की तस्वीर पर पड़ी, जिसे देखने के बाद मैं वापिस होश में आ गया क्यूंकि मैं अपनी पत्नी और बच्चे से बहुत प्यार करता था और किसी भी हाल में उन्हें धोखा नहीं दे सकता था। तब मैंने नीलू को धक्का देकर खुद से दूर हटा दिया। लेकिन नीलू के सर पर तो अभीकुछ और ही सवार था और वह फिर से मेरे करीब आने की कोशिश करने लगी। तो इस बार मैंने उसे एक थप्पड़ रसीद कर दिया। इसके बाद वह गुस्से में मेरे कमरे से बाहर चली गई। जब कुछ समय के बाद मेरी पत्नी बच्चे को टीका लगवा कर घर वापिस आई, तो नीलू ने उल्टा अपने कपड़े फाड़ कर मेरे ऊपर ज़बरदस्ती का इल्जाम लगाने लगी। लेकिन मैंने अपनी पत्नी को बताया की यह सब झूठ है, और ये सब इसी का किया धरा है। लेकिन मेरी पत्नी ने मेरी बात सुनने से अधिक अपनी बहन कि बात पर यकीन किया। और मेरी कोई बात सुनने को तैयार नहीं थी और लगातार रोए जा रही थी तब मुझे याद आया एक बार कुछ महीने पहले हमारे घर में चोरी हुई थी। और हम ने घर में कुछ हिडन कैमरा लगवाए थे। इसके बाद मैंने अपनी पत्नी को हिडन कैमरे की फुटेज चेक करने के लिए कहा। जब उसकी फूटेज मेरी पत्नी के सामनेआई तब उसे मेरी बातों पर यकीन हुआ और उसके बाद उसने नीलू को बहुत डांटा और उसी दिन उसे अपने मायके भेज दी। अगर वह कैमरा कि फूटेज ना मिलती, तो हो सकता था कि हमारा घर तबाह हो जाता ।